-हिंदी को बचाएं
-पाठ्यक्रम से लेकर आम बोलचाल में भी है अंग्रेजी का बोलबाला
-भागलपुर की 40 प्रतिशत आबादी की भाषा में भी हुआ परिर्वतन
अंग्रेजी के असर ने बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों के युवाओं पर भी अपनी छाप छोड़ता जा रहा है। इसका एक कारण है पढ़ाई के साथ जीवन स्तर में समय के अनुसार बदलाव। जानकारों की मानें तो शिक्षा क्षेत्र में भी अंग्रेजी पर ही जोर दिया जा रहा है और बोचलाल भी बदलती जा रही है। ऐसे में एक प्रश्न बनकर उभर रहा है कि भागलपुर की 40 प्रतिशत की आबादी की भाषा में अचानक परिर्वतन देखने को कैसे मिल रहा है।
कोई हिंदी के लिए लड़ रहा तो कोई अंग्रेजी सीखने के लिए
हिंदी-अंगे्रजी के भेद ने आज दो तबकों को भीड़ में खड़ा कर दिया है। एक जो अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहा है और दूसरा जो अंग्रेजी सीखने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। लेकिन, काबीलियत की होड़ हर तरफ एक जैसी बनी हुई है। जात-पात को पीछे छोड़ भाषा की लड़ाई एक तरफ चल रही है और दूसरी तरफ भाषा के भेदभाव में हिंदी को आखिरी पायदान पर धकेल दिया गया है।
युवाओं की राय-
जिस रफ्तार से हिंदी विलुप्त होती जा रही है, उससे लगता है कि अंग्रेजी शासन का यह दूसरा अध्याय है। किसी भी पाठ्यक्रम में हिंदी को महत्व नहीं दिया जा रहा है।
- देवकांत, इंजीनियरिंग के छात्र
हिंदी तो हमारे रग-रग में है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र और युवाओं की बोलचाल में यह खत्म सी हो गई है। इसका एक कारण शिक्षा स्तर का बदलाव भी है।
- कुणाल, बीए के छात्र
- जिस प्रकार से हिंदी को खत्म किया जा रहा, वह चिंता का विषय है। पढ़ाई से लेकर बोलचाल तक को अंग्रेजी प्रभावित कर रही है। इसलिए जागरूकता जरूरी है।
- दीपक, 11वीं के छात्र
एक तरफ हिंदी खत्म होती जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ हिंदी को भी परीक्षा के प्रश्नप्रत्र में और जटिल बनाकर पेश किया जा रहा है। इसे रोकने पर भी ध्यान देना होगा।
- सौरव, बीए के छात्र
-पाठ्यक्रम से लेकर आम बोलचाल में भी है अंग्रेजी का बोलबाला
-भागलपुर की 40 प्रतिशत आबादी की भाषा में भी हुआ परिर्वतनअंग्रेजी के असर ने बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों के युवाओं पर भी अपनी छाप छोड़ता जा रहा है। इसका एक कारण है पढ़ाई के साथ जीवन स्तर में समय के अनुसार बदलाव। जानकारों की मानें तो शिक्षा क्षेत्र में भी अंग्रेजी पर ही जोर दिया जा रहा है और बोचलाल भी बदलती जा रही है। ऐसे में एक प्रश्न बनकर उभर रहा है कि भागलपुर की 40 प्रतिशत की आबादी की भाषा में अचानक परिर्वतन देखने को कैसे मिल रहा है।
कोई हिंदी के लिए लड़ रहा तो कोई अंग्रेजी सीखने के लिए
हिंदी-अंगे्रजी के भेद ने आज दो तबकों को भीड़ में खड़ा कर दिया है। एक जो अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहा है और दूसरा जो अंग्रेजी सीखने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। लेकिन, काबीलियत की होड़ हर तरफ एक जैसी बनी हुई है। जात-पात को पीछे छोड़ भाषा की लड़ाई एक तरफ चल रही है और दूसरी तरफ भाषा के भेदभाव में हिंदी को आखिरी पायदान पर धकेल दिया गया है।
युवाओं की राय-
जिस रफ्तार से हिंदी विलुप्त होती जा रही है, उससे लगता है कि अंग्रेजी शासन का यह दूसरा अध्याय है। किसी भी पाठ्यक्रम में हिंदी को महत्व नहीं दिया जा रहा है।
- देवकांत, इंजीनियरिंग के छात्र
हिंदी तो हमारे रग-रग में है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र और युवाओं की बोलचाल में यह खत्म सी हो गई है। इसका एक कारण शिक्षा स्तर का बदलाव भी है।
- कुणाल, बीए के छात्र
- जिस प्रकार से हिंदी को खत्म किया जा रहा, वह चिंता का विषय है। पढ़ाई से लेकर बोलचाल तक को अंग्रेजी प्रभावित कर रही है। इसलिए जागरूकता जरूरी है।
- दीपक, 11वीं के छात्र
एक तरफ हिंदी खत्म होती जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ हिंदी को भी परीक्षा के प्रश्नप्रत्र में और जटिल बनाकर पेश किया जा रहा है। इसे रोकने पर भी ध्यान देना होगा।
- सौरव, बीए के छात्र
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