दिल्ली में प्रचंड गर्मी के बीच जारी बिजली संकट की मार झेल रही दिल्ली की जनता काफी परेशान और हताश है। निजीकरण के समझौते को तकरीबन 12 साल हो गए, लेकिन सरकार अपने वायदें पर कहीं भी खरी नही उतरी, आए दिन ओवर लोड के वजह से ट्रांसफोर्मर जल रहे हैं या उनका फ्यूज उड़ जाता है और कहीं पावर स्टेशन काम करना बंद कर देता है।
गर्मी आते ही इस प्रकार की दिक्कतें हो जाती हैं और समय के लम्बे अंतराल के बाद यह परेशानी काफी बढ़ गई। दिल्ली शहर बिजली कटौती से परेशान हो चला है। 2002 में यह अहम फैसला लेते हुए बिजली का निजीकरण कर दिया गया, इस निजीकरण ने संसद से लेकर सड़कों पर उथल-पुथल मचा दी। विपक्ष में बैठी सरकार ने तो इस निर्णय पर अपना विरोध प्रर्दशन वॉकआउट के रूप में किया।
सरकार आम जनता से कुछ एक लुभावने वायदें करने लगी। जिससे जनता को यह निजीकरण का फैसला सही लगे। घाटे में चल रही बिजली अगर निजी हाथों में सौंप दी जाए, तो यह एक बेहतर विकास का उम्दा कदम होगा। इसी को देखते हुए दिल्ली में आपूर्ति का ज़िम्मा दो निजी कंपनियों को दिया गया। जिसमें एक यमुना पावर और दूसरी टाटा पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी हैं।
निजी कंपनियों के आने के बाद विद्युत की आपूर्ति में सुधार ज़रूर हुआ, मगर इससे बिजली महंगी होती चली गई। निजी कंपनियों का तर्क है कि वो महंगी दर पर बिजली ख़रीद रही हैं, इसलिए बिजली के दर बढ़ानी पड़ी है। सरकार ने तो ऐसे वादे आम जनता के समक्ष रखे, जिससे लगने लगा की अब बिजली की दरें पहले की दरों से काफी कम और वितरण प्रणाली काफी हद तक दुरुस्त होंगी और 24 घन्टे बिजली का वितरण रहेगा। यानि दिल्ली में कोई अंधकार के साये में नही रहेगा।
यह निजीकरण का फैसला सरकार पर ही भाड़ी पड़ता नजर आने लगा। क्या यह निर्णय सोच समझ कर लिया गया फैसला था और क्या सरकार ने इस फैसले में कहीं जल्दबाजी तो नहीं दिखाई। सरकार ने यह फैसला ले तो लिया, मगर निजी कंपनियों को मालिकाना हक दे देने से क्या बिजली आज के परिदृश्य में सही रूप से संचालित और बेहतर परिणाम दे पा रही है।
सरकार संसाधन को बेहतर कार्य रूप बनाने के बजाए अब आम जनता से अपील करने पर उतर आई की। दिल्ली में प्रचंड गर्मी के बीच जारी बिजली संकट से निपटने के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग ने कुछ खास दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत शॉपिंग मॉल्स को रात 10 बजे के बाद बिजली नहीं मिलेगी।
साथ ही सरकारी दफ्तरों, स्कूल-कॉलेजों और लोगों से एसी कुछ घंटे न चलाने की अपील की गई है। लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग ने रविवार को दिल्ली में बिजली संकट को लेकर बैठक की। इस बैठक में उन्होंने रात 10 बजे के बाद शॉपिंग मॉल्स को बिजली न देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही स्कूल-कॉलेजों से अपील की गई है कि वे बिजली बचाने के लिए दोपहर 3.30 से 4.40 बजे के बीच एसी न चलाएं।
मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली को रात के समय बिजली देने का प्रस्ताव दिया है। पत्र में बताया गया है कि वर्तमान में मध्य प्रदेश द्वारा दिल्ली को 231.5 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा रही है। बिजली संकट के समाधान के लिए मध्य प्रदेश दिल्ली को अतिरिक्त बिजली देने के लिए तैयार है।

