Thursday, 11 June 2015

निजी कंपनियों के जिम्मे दिल्ली बिजली बोर्ड..

दिल्ली में प्रचंड गर्मी के बीच जारी बिजली संकट की मार झेल रही दिल्ली की जनता काफी परेशान और हताश है। निजीकरण के समझौते को तकरीबन 12 साल हो गए, लेकिन सरकार अपने वायदें पर कहीं भी खरी नही उतरी, आए दिन ओवर लोड के वजह से ट्रांसफोर्मर जल रहे हैं या उनका फ्यूज उड़ जाता है और कहीं पावर स्टेशन काम करना बंद कर देता है।
गर्मी आते ही इस प्रकार की दिक्कतें हो जाती हैं और समय के लम्बे अंतराल के बाद यह परेशानी काफी बढ़ गई। दिल्ली शहर बिजली कटौती से परेशान हो चला है। 2002 में यह अहम फैसला लेते हुए बिजली का निजीकरण कर दिया गया, इस निजीकरण ने संसद से लेकर सड़कों पर उथल-पुथल मचा दी। विपक्ष में बैठी सरकार ने तो इस निर्णय पर अपना विरोध प्रर्दशन वॉकआउट के रूप में किया।
सरकार आम जनता से कुछ एक लुभावने वायदें करने लगी। जिससे जनता को यह निजीकरण का फैसला सही लगे। घाटे में चल रही बिजली अगर निजी हाथों में सौंप दी जाए, तो यह एक बेहतर विकास का उम्दा कदम होगा। इसी को देखते हुए दिल्ली में आपूर्ति का ज़िम्मा दो निजी कंपनियों को दिया गया। जिसमें एक यमुना पावर और दूसरी टाटा पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी हैं।
निजी कंपनियों के आने के बाद विद्युत की आपूर्ति में सुधार ज़रूर हुआ, मगर इससे बिजली महंगी होती चली गई। निजी कंपनियों का तर्क है कि वो महंगी दर पर बिजली ख़रीद रही हैं, इसलिए बिजली के दर बढ़ानी पड़ी है। सरकार ने तो ऐसे वादे आम जनता के समक्ष रखे, जिससे लगने लगा की अब बिजली की दरें पहले की दरों से काफी कम और वितरण प्रणाली काफी हद तक दुरुस्त होंगी और 24 घन्टे बिजली का वितरण रहेगा। यानि दिल्ली में कोई अंधकार के साये में नही रहेगा।
यह निजीकरण का फैसला सरकार पर ही भाड़ी पड़ता नजर आने लगा। क्या यह निर्णय सोच समझ कर लिया गया फैसला था और क्या सरकार ने इस फैसले में कहीं जल्दबाजी तो नहीं दिखाई। सरकार ने यह फैसला ले तो लिया, मगर निजी कंपनियों को मालिकाना हक दे देने से क्या बिजली आज के परिदृश्य में सही रूप से संचालित और बेहतर परिणाम दे पा रही है।
सरकार संसाधन को बेहतर कार्य रूप बनाने के बजाए अब आम जनता से अपील करने पर उतर आई की। दिल्ली में प्रचंड गर्मी के बीच जारी बिजली संकट से निपटने के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग ने कुछ खास दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत शॉपिंग मॉल्स को रात 10 बजे के बाद बिजली नहीं मिलेगी।
साथ ही सरकारी दफ्तरों, स्कूल-कॉलेजों और लोगों से एसी कुछ घंटे न चलाने की अपील की गई है। लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग ने रविवार को दिल्ली में बिजली संकट को लेकर बैठक की। इस बैठक में उन्होंने रात 10 बजे के बाद शॉपिंग मॉल्स को बिजली न देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही स्कूल-कॉलेजों से अपील की गई है कि वे बिजली बचाने के लिए दोपहर 3.30 से 4.40 बजे के बीच एसी न चलाएं।
मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली को रात के समय बिजली देने का प्रस्ताव दिया है। पत्र में बताया गया है कि वर्तमान में मध्य प्रदेश द्वारा दिल्ली को 231.5 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा रही है। बिजली संकट के समाधान के लिए मध्य प्रदेश दिल्ली को अतिरिक्त बिजली देने के लिए तैयार है।

Monday, 8 June 2015

‘विकास के इमारत पर भारत’

स्कूली शिक्षा के दौरान आपने विकास के कई रूप देखें होंगे।मगर विकास का आकलन करने  की कोई निश्चित तय पैमाना नहीं है। विकास वह साधन है जो किसी-न-किसी रूप में एक बड़े आबादी को प्रभावित करती है।कभी सड़क के नाम पर तो कभी बिजली के नाम पर या फिर स्कूल और अस्पताल के नाम पर।
भारत  अभी तकनीक के क्षेत्र में अपने पाँव पसार रहा है, बढ़ती टेक्नोलॉजी शहर के साथ-साथ गांव को भी कदम से कदम मिलाने की सीख दे रही हैं।
हाल के दिनों में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल और इनटरनेट प्रयोग की  होड़ लगी है। सरकारी आकड़ों के मुताबिक गांवों में सूचना प्रोधोगिकी के बढ़ाव से कृषि,भूमि-अभिलेख और सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक नए मुकाम पर पहुंच गए है,जिसे हम जमीनी धरातल पर भी महसूस कर सकते हैं ।  सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से शासन तक आम आदमी की पहुंच आसान हो गई है।
पारदर्शी प्रशासन लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूती प्रदान करती है। एक इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन एकत्रीकरण एवं विश्लेषण वेब साईट के अनुसार 3.5 अरब इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन 2014 में दर्ज की गई। फिछले साल के मुकाबले 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। सूचना प्रोधोगिकी ने सकारात्मक रूप से सामाजिक स्तर को बढ़ावा दिया।
वास्तविक जगत समय में हुए कुल इ-टाल संगणक आधारित व्यवहारों ई-ट्रांजेक्शनस, जो की भारतीयों और केन्द्रीय और राज्य सरकारों के 2,848 संगठनों और विभागों के बीच हुए | 29 सेवा क्षेत्र हैं जिनमें भूमि दस्तावेज, कृषि, सूचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिलों के और बिजली पेमेंटआदि शामिल हैं |
ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वहीहै जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारितआंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदानप्रदान के अभिनव रिकार्ड्स हैं |एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है|उदहारण के स्वरूप एक आर टी आई  का मतलब सूचना का अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग (डी.ओ.पी.टी) की वेबसाइटwww.rtionline.gov.in या कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश(एस.एम.एस) के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को ई- ट्रांजेक्शन कहा जाता है |
विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादा तर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की वर्तमान कीमतों और पी.डी.एस द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं | ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वही है जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारित आंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदान प्रदान के अभिनव दर्ज हैं | एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है| एक उदहारण की मदद से समझा जा सकता है एक आर टी आई यानी की सूचना के अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग डी.पी.टी की वेबसाइटwww.rtionline.gov.in या फिर कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को ई- ट्रांजेक्शन कह सकते है | हमारे विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादा तर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की बाजार में वर्तमान कीमतों और पी.डी.एस द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं |भारत में आंध्र प्रदेश ने सबसे ज्यादा ई- गवर्नेंस की संख्या में विस्तार किया गया है – जिसमें उसने 224 ई-सेवाएँ , उसके बाद तेलंगाना 186 और गुजरात ने 181 ई- सेवाओं का विस्तार किया | ग्रामीण ई-प्रबंधन और सेवा के क्षेत्रों में उक्त ज्यादा सेवाएँ होने का मतलब है कि किसी स्तर पर ई- सेवा क्षेत्र में ज्ञान की कमी है- परिणाम स्वरुप बहुत सी ई-गवर्नेंस योजना यें असफल हो गयी | कुछ हद तक सरकारी ई-गवर्नेंस केप्रोजेक्ट्स असफल होने के प्रमुख कारणों में से एक है कि उनको बिना समुचित , “बेक-एंड सपोर्ट” के बिना ही बनाया गया , जिसके कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं को काफी निराशा का सामना करना पड़ा। ई- ट्रांजेक्शन की संख्या 3.5 बिलियन होने का यह मतलब नहीं की ई-गवर्नेंस के सभी मानक सही ढंग से काम कर रहे हैं |राज्य सरकारों की ई- गवर्नेंस परियोजनों को छोडकर लगभग 20 मिशन परियोजनाएं हैं जो कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान के तहत पहली बार वर्ष 2004-5 में बने, उनमे से एक प्रोजेक्ट एमसीए 21 है यह ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिस पर वैधानिक तौर पर सभी सार्वजनिक औरनिजी कम्पनियों को अपने वित्तीय और शेयर धारकों से सम्बंधित सूचना अपलोड कर सकते हैं।




Tuesday, 2 June 2015

बढ़ता कदम पॉजिटिव सोच की ओर...


बजुर्गो ने सही कहा है दवा से ज्यादा काम दुआ करती है। दुआ से तात्पर्य है पॉजिटिव एनर्जी। उदाहरण के तौर पर हम देख सकते है कि देश में हालिया आए लोकसभा चुनावो के परिणामों ने देश के नागरिकों के सामने एक सकारात्मक पहलू पेस किया। प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी जी को। जब हर तरफ यह लगने लगा था कि देश का अब कुछ नहीं हो सकता, वहीं भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल एक उम्मीद जगाने में कामयाब रहे,बल्कि कई युवाओं के लिए सपने भी बुनने का काम किया।राजनीतिक गलियारों से लेकर खेल के मैदान तक सकारात्मक सोच ने कई लोगों के लिए ऐसे और अनोखे एक्साम्प्ल पेस किया। सायद ही किसी ने अपनी वास्तविक जिंदगी में सोचा हो।

गांधी जी का कहना था...

अपनी जिंदगी का एक लक्ष्य बनाकर चलें तो दिमाग को भटकने से बचाया जा सकता है। किसी भी अप्रिय स्थिति का सारा दोष खुद पर ही न मढ़ लें। इसके लिए परिस्थितियां भी दोषी हो सकती हैं। आपकी काबिलियत इसमें है कि आप इन परिस्थितियों को खुद पर हावी न होने दें और खुद में सकारात्मकता का संचार करें। इसमें आपके करीबी दोस्त व रिश्तेदार आपकी मदद कर सकते हैं।'

एक प्रसिद्ध कहानी की मद्द से सकारात्मक बातों को समझा जा सकता है..

एक ऋषि के दो शिष्य थे| जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था| एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये|

जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे| ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो| फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है|  शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है| इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए| फिर दूसरे शिष्य से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा|  इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए| गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा|

मानव  कई प्रकार की समस्याओं पर विजय पाने में सक्षम रहा ,लेकिन फिर भी कई बार वह असहाय  महसूस करता है क्यूँ ?  नकारात्मक सोच एक बड़ी वजह मानी जा सकती है । नकारात्मक सोच आपके नज़रिए को बदल देता है जिससे आपका काम और व्यक्तिगत जीवन दोनों प्रभावित होता है और नतीज़तन आपकी प्रगति बाधित होती है।

सकारात्मक सोच का संबंध सिर्फ आपके और आप के करियर से ही नहीं है,बल्कि यह आपके पारिवारिक जीवन और सामाजिक जीवन से भी जुड़ा है। नकारात्मक शक्ति एक तरह की चुबंक प्रणाली की तरह काम करती है वह आपको और आप के आस-पास की समाजीक माहौल को भी प्रभावित करती है। साथ ही गलत विचार वाले व्यक्ति अपने आसपास एक ऐसा नकारात्मक माहौल बना लेते हैं। जो उनके साथ-साथ उनके आसपास के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा अपना असर छोड़ देता है।

कभी आप ने अंदाजा लगाया होगा कि जब आप जीवन या फिर भविष्य के प्रति पॉजिटिव बातें करते हैं तो बहुत से लोग आपकी ओर आकर्षि‍त होते हैं वहीं अगर आप हर समय जीवन के नेगेटिव पहलुओं को ही याद करते रहते हैं तो हर कोई आप से नजरे चुराना चाहेगा।

जीवन से जुड़ी अपेक्षाएं पूरी न होने पर निराशा स्वाभाविक है लेकिन अगर आप उस निराशा के अंधेरे में ही डूबे रहेंगे तो आशा की दूसरी किरणों को पहचान भी नहीं पाएंगे। याद कीजिए फिल्म थ्री इडियट्स में आमिर खान का वह जुमला-‘ऑल इज वैल’ (सब सही होगा/या फिर सब सही है) जो की लम्बें समय तक लोगों के जुबान पर सिंहासन लगाए विराजमान था।


आमिर इस फिल्म में कहते भी हैं कि यह जुमला कहने का यह मतलब नहीं कि सारी परेशानियां खत्म हो गईं। बल्कि इसे बोलने का मकसद तो हमारे सामने पेश आने वाली परेशानियों से लड़ने की ताकत हासिल करना है।

जीवन में उतार-चढ़ाव आना लाजमी है। लेकिन आपके असल व्यक्तित्व की पहचान आपके उस रवैये से है जो आप परेशानियों में घिरा होने पर अपनाते हैं। कुछ लोग जीवन के सकारात्मक पहलुओं को ढूंढ-ढूंढ कर अपनी जिंदगी में उत्साह बरकरार रखते हैं और कुछ लोग नकारात्मकता से इस कदर घिर जाते हैं कि कोई गलत कदम उठाने से भी नहीं चूकते।

मानव ने कई प्रकार की समस्याओं पर विजय पा ली,लेकिन फिर भी वह असहाय  है नकारात्मक/नेगेटिव शक्ति के बीच। मगर जिंदगी के दो पहलू है एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्क। मनुष्य जीवन में कई दफा मुश्किलों ने अपनी चाल बदली और मानव जाति पर साये की तरह उसके आस-पास ही मंडराती रहती है,कई बार देखने मॆं आया इन पेचीदगी के कारण मनुष्य के व्यवहार में बहुत सारे ऐसे विकट परिवर्तन देखने को मिली जिससे न केवल उसकी छवी खरब हुई बल्कि उसके जीवन में नकारात्म शक्ति ने जगह बना कर उस पर हावी होती रही। दुख मनुष्य से ऐसे-ऐसे काम करवा लेता है, जो वह होश में रहकर तो कभी नहीं करना चाहेगा। दुख मनुष्य के अंदर विचलन लाता है। इसलिए मनुष्य को अपनी ऊर्जा को संचय कर सकारात्मक कामों में लगाना चाहिए।

अगर मनुष्य अपने विचारों को पॉजिटिव के मधुर नीर में पिरो दे तो यह एक शुऱूआत हो सकती है,किसी भी रूके काम को एक सकारात्मक सोच के साथ शुरू करने की। अगर सोच जेसी रहेगी आप से वेसे लोगों का जुड़ना भी लगा रहेगा। कहते न की सोच पर दुनिया चलती है उसी पर इसकी बदलाव की नीव भी रखी जाती है और उसी तरह सकारात्मक विचार रखने वाले आपसे जुड़ना पसंद करेंगे।भारतीय संस्कृति में खुशी वास्तुशास्त्र और फेंगशुई का चलन बढ़ा। वाकई, घर में सकारात्मक शक्तियों के फैलाव से खुशहाली पनपती है। आज के दौर में लोगों का वास्तुशास्त्र और फेंगशुई के प्रति रुझान काफी बढ़ गया है।

एक पॉजिटिव एनर्जी मनुष्य के व्यवाहार के साथ उसके स्वास्थ को भी लाभ पहुचाता है-

आयु में बढ़ोतरी

उदासी में कमी

हृदय रोग में कमी

जिस समय आप नेगेटिव चीजों में भी पॉजिटिव पक्ष का आकलन करना सीख जाएंगे उस दिन कोई भी रुकावट आपका मनोबल गिराने में सफल नहीं हो पाएगी।