स्कूली शिक्षा के दौरान आपने विकास के कई रूप देखें होंगे।मगर विकास का आकलन करने की कोई निश्चित तय पैमाना नहीं है। विकास वह साधन है जो किसी-न-किसी रूप में एक बड़े आबादी को प्रभावित करती है।कभी सड़क के नाम पर तो कभी बिजली के नाम पर या फिर स्कूल और अस्पताल के नाम पर।
भारत अभी तकनीक के क्षेत्र में अपने पाँव पसार रहा है, बढ़ती टेक्नोलॉजी शहर के साथ-साथ गांव को भी कदम से कदम मिलाने की सीख दे रही हैं।
हाल के दिनों में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल और इनटरनेट प्रयोग की होड़ लगी है। सरकारी आकड़ों के मुताबिक गांवों में सूचना प्रोधोगिकी के बढ़ाव से कृषि,भूमि-अभिलेख और सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक नए मुकाम पर पहुंच गए है,जिसे हम जमीनी धरातल पर भी महसूस कर सकते हैं । सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से शासन तक आम आदमी की पहुंच आसान हो गई है।
पारदर्शी प्रशासन लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूती प्रदान करती है। एक इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन एकत्रीकरण एवं विश्लेषण वेब साईट के अनुसार 3.5 अरब इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन 2014 में दर्ज की गई। फिछले साल के मुकाबले 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। सूचना प्रोधोगिकी ने सकारात्मक रूप से सामाजिक स्तर को बढ़ावा दिया।
वास्तविक जगत समय में हुए कुल इ-टाल संगणक आधारित व्यवहारों ई-ट्रांजेक्शनस, जो की भारतीयों और केन्द्रीय और राज्य सरकारों के 2,848 संगठनों और विभागों के बीच हुए | 29 सेवा क्षेत्र हैं जिनमें भूमि दस्तावेज, कृषि, सूचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिलों के और बिजली पेमेंटआदि शामिल हैं |
ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वहीहै जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारितआंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदानप्रदान के अभिनव रिकार्ड्स हैं |एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है|उदहारण के स्वरूप एक आर टी आई का मतलब सूचना का अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग (डी.ओ.पी.टी) की वेबसाइटwww.rtionline.gov.in या कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश(एस.एम.एस) के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को ई- ट्रांजेक्शन कहा जाता है |
विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादा तर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की वर्तमान कीमतों और पी.डी.एस द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं | ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वही है जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारित आंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदान प्रदान के अभिनव दर्ज हैं | एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है| एक उदहारण की मदद से समझा जा सकता है एक आर टी आई यानी की सूचना के अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग डी.पी.टी की वेबसाइटwww.rtionline.gov.in या फिर कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को ई- ट्रांजेक्शन कह सकते है | हमारे विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादा तर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की बाजार में वर्तमान कीमतों और पी.डी.एस द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं |भारत में आंध्र प्रदेश ने सबसे ज्यादा ई- गवर्नेंस की संख्या में विस्तार किया गया है – जिसमें उसने 224 ई-सेवाएँ , उसके बाद तेलंगाना 186 और गुजरात ने 181 ई- सेवाओं का विस्तार किया | ग्रामीण ई-प्रबंधन और सेवा के क्षेत्रों में उक्त ज्यादा सेवाएँ होने का मतलब है कि किसी स्तर पर ई- सेवा क्षेत्र में ज्ञान की कमी है- परिणाम स्वरुप बहुत सी ई-गवर्नेंस योजना यें असफल हो गयी | कुछ हद तक सरकारी ई-गवर्नेंस केप्रोजेक्ट्स असफल होने के प्रमुख कारणों में से एक है कि उनको बिना समुचित , “बेक-एंड सपोर्ट” के बिना ही बनाया गया , जिसके कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं को काफी निराशा का सामना करना पड़ा। ई- ट्रांजेक्शन की संख्या 3.5 बिलियन होने का यह मतलब नहीं की ई-गवर्नेंस के सभी मानक सही ढंग से काम कर रहे हैं |राज्य सरकारों की ई- गवर्नेंस परियोजनों को छोडकर लगभग 20 मिशन परियोजनाएं हैं जो कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान के तहत पहली बार वर्ष 2004-5 में बने, उनमे से एक प्रोजेक्ट एमसीए 21 है यह ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिस पर वैधानिक तौर पर सभी सार्वजनिक औरनिजी कम्पनियों को अपने वित्तीय और शेयर धारकों से सम्बंधित सूचना अपलोड कर सकते हैं।
भारत अभी तकनीक के क्षेत्र में अपने पाँव पसार रहा है, बढ़ती टेक्नोलॉजी शहर के साथ-साथ गांव को भी कदम से कदम मिलाने की सीख दे रही हैं।
हाल के दिनों में ग्रामीण इलाकों में मोबाइल और इनटरनेट प्रयोग की होड़ लगी है। सरकारी आकड़ों के मुताबिक गांवों में सूचना प्रोधोगिकी के बढ़ाव से कृषि,भूमि-अभिलेख और सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक नए मुकाम पर पहुंच गए है,जिसे हम जमीनी धरातल पर भी महसूस कर सकते हैं । सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से शासन तक आम आदमी की पहुंच आसान हो गई है।
पारदर्शी प्रशासन लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूती प्रदान करती है। एक इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन एकत्रीकरण एवं विश्लेषण वेब साईट के अनुसार 3.5 अरब इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन 2014 में दर्ज की गई। फिछले साल के मुकाबले 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। सूचना प्रोधोगिकी ने सकारात्मक रूप से सामाजिक स्तर को बढ़ावा दिया।
वास्तविक जगत समय में हुए कुल इ-टाल संगणक आधारित व्यवहारों ई-ट्रांजेक्शनस, जो की भारतीयों और केन्द्रीय और राज्य सरकारों के 2,848 संगठनों और विभागों के बीच हुए | 29 सेवा क्षेत्र हैं जिनमें भूमि दस्तावेज, कृषि, सूचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिलों के और बिजली पेमेंटआदि शामिल हैं |
ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वहीहै जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारितआंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदानप्रदान के अभिनव रिकार्ड्स हैं |एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है|उदहारण के स्वरूप एक आर टी आई का मतलब सूचना का अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग (डी.ओ.पी.टी) की वेबसाइटwww.rtionline.gov.in या कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश(एस.एम.एस) के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को ई- ट्रांजेक्शन कहा जाता है |
विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादा तर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की वर्तमान कीमतों और पी.डी.एस द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं | ई- सेवाओं के इस्तेमाल का यह मतलब नहीं है कि उनकी वर्तमान गुणवत्ता वही है जो कि वास्तव में होना चाहिए, लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल सहाए आधारित आंकड़े भारतीय किसानों और विभिन्न सरकारों के बीच हुए संदेशों के आदान प्रदान के अभिनव दर्ज हैं | एक ई- ट्रांजेक्शन एक सरकारी प्रेषण सेवा है जो कि कंप्यूटर के माध्यम से दी जाती है| एक उदहारण की मदद से समझा जा सकता है एक आर टी आई यानी की सूचना के अधिकार के नियम के अंतर्गत किया गया कोई प्रश्न, कार्मिक और ट्रेनिंग विभाग डी.पी.टी की वेबसाइटwww.rtionline.gov.in या फिर कोई किसान मौसम सम्बन्धी जानकारी अगर मोबाइल सन्देश के जरिये वेबसाइट से प्राप्त करता है तो उसके इस सन्देश ग्रहण करने के कार्य को ई- ट्रांजेक्शन कह सकते है | हमारे विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय किसान ई- सेवाओं के द्वारा ज्यादा तर जानकारियां मौसम सम्बन्धी, लैंड रिकार्ड्स की फोटोकॉपी या फसलों की बाजार में वर्तमान कीमतों और पी.डी.एस द्वारा जारी किये गए छूट प्रदत्त खाद्य कूपन प्राप्त करने के लिए करते हैं |भारत में आंध्र प्रदेश ने सबसे ज्यादा ई- गवर्नेंस की संख्या में विस्तार किया गया है – जिसमें उसने 224 ई-सेवाएँ , उसके बाद तेलंगाना 186 और गुजरात ने 181 ई- सेवाओं का विस्तार किया | ग्रामीण ई-प्रबंधन और सेवा के क्षेत्रों में उक्त ज्यादा सेवाएँ होने का मतलब है कि किसी स्तर पर ई- सेवा क्षेत्र में ज्ञान की कमी है- परिणाम स्वरुप बहुत सी ई-गवर्नेंस योजना यें असफल हो गयी | कुछ हद तक सरकारी ई-गवर्नेंस केप्रोजेक्ट्स असफल होने के प्रमुख कारणों में से एक है कि उनको बिना समुचित , “बेक-एंड सपोर्ट” के बिना ही बनाया गया , जिसके कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं को काफी निराशा का सामना करना पड़ा। ई- ट्रांजेक्शन की संख्या 3.5 बिलियन होने का यह मतलब नहीं की ई-गवर्नेंस के सभी मानक सही ढंग से काम कर रहे हैं |राज्य सरकारों की ई- गवर्नेंस परियोजनों को छोडकर लगभग 20 मिशन परियोजनाएं हैं जो कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लान के तहत पहली बार वर्ष 2004-5 में बने, उनमे से एक प्रोजेक्ट एमसीए 21 है यह ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिस पर वैधानिक तौर पर सभी सार्वजनिक औरनिजी कम्पनियों को अपने वित्तीय और शेयर धारकों से सम्बंधित सूचना अपलोड कर सकते हैं।

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