भागलपुर शहर स्मार्ट सूची में अपना नाम दर्ज करा चुका है लेकिन इसके स्मार्ट बनने में अभी काफी वक्त लगेगा। शहर में दस हजार जुगाड़ गाड़ियां हवा में काला जहर फैला रही हैं। जनरेटर से चलने वाली गाड़ियां आम वाहनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा कार्बन मोनो ऑक्साइड छोड़ती है, जो पर्यावरण और जिंदगी के लिए बेहद खतरनाक है। यदि इसे नहीं रोका गया तो ये जिले के पर्यावरण में जहर घोल देगी। हैरत यह कि डीएम और कमिश्नर ने एक जून से इसके परिचालन पर रोक लगाने की बात कही थी लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ।
केंद्र सरकार की फ्यूल पालिसी रिपोर्ट के मुताबिक आम गाड़ियों से पर्यावरण को सिर्फ छह प्रतिशत नुकसान होता है, जिसकी भरपाई तीन पौधे लगाने से हो जाता है। जुगाड़ से होनेवाले प्रदूषण को लेकर पर्यावरणविद् कई बार गंभीर चिंता जाहिर कर चुके हैं। पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि अरविंद मिश्रा बताते हैं कि जुगाड़ गाड़ियां से निकलनेवाले धुआं से पर्यावरण में काला जहर फैलता है। शहर में लगे पेड़-पौधे भी इस प्रदूषण को एक बार में खत्म करने में नाकाम साबित हो जाते हैं। अगर इसके बगल से गुजरें या इसका धुआं लग जाए तो जी मिचलाने लगता है।
केंद्र सरकार की फ्यूल पालिसी रिपोर्ट के मुताबिक आम गाड़ियों से पर्यावरण को सिर्फ छह प्रतिशत नुकसान होता है, जिसकी भरपाई तीन पौधे लगाने से हो जाता है। जुगाड़ से होनेवाले प्रदूषण को लेकर पर्यावरणविद् कई बार गंभीर चिंता जाहिर कर चुके हैं। पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि अरविंद मिश्रा बताते हैं कि जुगाड़ गाड़ियां से निकलनेवाले धुआं से पर्यावरण में काला जहर फैलता है। शहर में लगे पेड़-पौधे भी इस प्रदूषण को एक बार में खत्म करने में नाकाम साबित हो जाते हैं। अगर इसके बगल से गुजरें या इसका धुआं लग जाए तो जी मिचलाने लगता है।
कार्बन मोनो आक्साड के अलावा यह ध्वनि प्रदूषण भी करती है। ये गाड़ियां बिना साइलेंसर के चलती हैं, जिससे काफी तेज आवाज होती है। कार्बन मोनो ऑक्साइड के अलावा कार्बन डाइऑक्साइड भी इससे काफी अधिक मात्रा में निकलती है। आम गाड़ियों के मुकाबले दस प्रतिशत अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन जुगाड़ से होता है।
कैंसर की बीमारी भी बांट रही
जुगाड़ गाड़ी लोगों में कैंसर की बीमारी भी बांट रही है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ हेमशंकर शर्मा ने बताया कि सांस की बीमारी और फेफरे का कैंसर जुगाड़ की धुओं से हो रहा है। हर रोज क्रानिक ब्रोकोलाइटिस के मरीज उनके यहां पहुंचते हैं। धुआं के फेफड़े में जाते ही वहां संक्रमण हो जाता है, जिससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत हाती है। शरीर फूलने लगता है। कुछ दिन बाद फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और कैंसर की बीमारी हो जाती है। ऐसे कई मामले उनके पास आ रहे हैं।
राजस्थान और गुजरात में होता है रजिस्ट्रेशन
देश के दूसरे राज्यों में भी जुगाड़ गाड़ियां चलती हैं। लेकिन वहां उनकी जांच होती है। प्रदूषण नियंत्रण का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। वहां गाड़ियों के पीछे नंबर प्लेट भी लगे रहते हैं। राजस्थान और गुजरात में जुगाड़ गाड़ी तभी बाहर निकाली जा सकती है, जब वह पूरी तरह से ठीक हो।
किसी गाड़ी से कितना प्रदूषण
कार 3 प्रतिशत
ट्रक 8 प्रतिशत
टैक्टर 6 प्रतिशत
बस 8 प्रतिशत
बाइक डेढ़ से दो
कैंसर की बीमारी भी बांट रही
जुगाड़ गाड़ी लोगों में कैंसर की बीमारी भी बांट रही है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ हेमशंकर शर्मा ने बताया कि सांस की बीमारी और फेफरे का कैंसर जुगाड़ की धुओं से हो रहा है। हर रोज क्रानिक ब्रोकोलाइटिस के मरीज उनके यहां पहुंचते हैं। धुआं के फेफड़े में जाते ही वहां संक्रमण हो जाता है, जिससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत हाती है। शरीर फूलने लगता है। कुछ दिन बाद फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और कैंसर की बीमारी हो जाती है। ऐसे कई मामले उनके पास आ रहे हैं।
राजस्थान और गुजरात में होता है रजिस्ट्रेशन
देश के दूसरे राज्यों में भी जुगाड़ गाड़ियां चलती हैं। लेकिन वहां उनकी जांच होती है। प्रदूषण नियंत्रण का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। वहां गाड़ियों के पीछे नंबर प्लेट भी लगे रहते हैं। राजस्थान और गुजरात में जुगाड़ गाड़ी तभी बाहर निकाली जा सकती है, जब वह पूरी तरह से ठीक हो।
किसी गाड़ी से कितना प्रदूषण
कार 3 प्रतिशत
ट्रक 8 प्रतिशत
टैक्टर 6 प्रतिशत
बस 8 प्रतिशत
बाइक डेढ़ से दो





