Friday, 25 September 2015

पुल निर्माण पर बटोर ले जाते हैं,नेता वोट

-श्रीरामपुर गांव में पानी,बिजली और सड़क गायब
-न सप्लाई पानी है,न चलने लायक सड़क
-500घरों में से केवल 20 प्रतिशत घर में शौचालय

बिहार के भागलपुर जिला के नाथनगर प्रखंड की रत्तीपुर बोरिया पंचायत के श्रीरामपुर गांव की 3 हजार की आाादी आज भी पक्के सड़क,साफ पानी और शौचालय को तरस रही है। आजादी से अब तक श्रीरामपुर गांव में आने-जाने के लिए आ तक पक्की सड़क नहीं बनी। हालांकि चुनाव से पहले सासंद और विधायक आते-जाते रहे और पुलानाने,गांव का विकास के वायदे करते रहे, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन भर ही मिला है। आज भी गांव में जाने के लिए केवल कच्ची सड़क है,जो बरसात होते ही चलने लायक नहीं रहती । गांव को शहर से जोड़ने वाली एक चचड़ी पुल है वह भी भगवान भरोसे है। जमुनिया नदीं में बारिश के दिनों में जल स्तर बढ़ने के साथ ही लोगों का शहर से संपर्क टूट जाता है।

-500घरों में से केवल 20 प्रतिशत घर में शौचालय
लोकसभा हो या विधानसभा चुनाव, लंबे-चौडे़ वादे कर नेताजी वोट तोाटोर ले जाते है,लेकिन चुनाव के बाद कोई हालचाल जानने तक नहीं पहुंचता। आ फिर चुनाव आते ही नेताओं के साथ उनके सहयोगियों का जामड़ा लगना शुरू हो गया है लेकिन विकास कीाात आते ही नेता मुंह छुपाने लगते हैं।
500 घरों की 3हजार आाादी वाला श्रीरामपुर गांव सड़क के साथ विकास की दूसरीाुनियादी जरूरतों से भी वंचित है। गांव के मात्र 20 प्रतिशत घरों में ही शौचालय  है। जाकि 80 प्रतिशत लोगों को घरों सेााहर शौच के लिए जाना पड़ता है। गांव में कईाार आपत्ति जनक घटनाएं हो चुकी हैं। महिलाओं को काफी परेशानियां उठानी होती है।

श्रीरामपुर की राजनीति पुल से शुरू होती है और पुल पे खत्म । लेकिन पुल का काम काभी नहीं हो पाया है। विमलकांत यादव,गुडेस यादव,रामचरण यादव,प्रकाश यादव,मुकेश यादव,दिनेश यादव,गौरव कुमार, सक्लदिव कुमार ने बताया कि पुल स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण अधर में है। हमारे विधायक नेताजी-जनप्रतिनिधि जो एक बार चुनाव जीत कर गए,सो उनका कोई अता-पता नहीं है।  चुनाव के समय एक भरोसा रहता है कि कही इसाार पुरान जाए जिससे नाथनगर से दूरी गांव की कम हो जाएगी लेकिन चुनाव के साथ नेताजी के वादे भी अगली बार के लिए टल गए। नाला बना तो लगा कि सड़क भी बन जाएगी लेकिन नाला टूुटने पर है, पर पक्की सड़क का कोई चर्चा ही नहीं। लोगों को नाथनगर जाने के लिए 7 कि.मी घूम के जाना पड़ता है। शाम साताजे केााद ऑटो की आवाजाही भीांद हो जाती हैं। ग्रामीणों ने चर्चा कि चुनाव से पहले कुछ नेता आये  जिन्होंने  पुल निर्माण का दिया भरोसा सुबोध राय,सुशिल मोदी,शाहनवाज हुसैन,बूलो मंडल लेकिन महीने, साल दर साल बीता पुल नहीं बना ।

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