जॉनी लीवर जाने-माने कामेडियन तो हैं, यह सभी जानते हैं। बीएम देसाई, याकूब, महमूद, जॉनीवाकर, ओमप्रकाश, आगा से असरानी तक हास्य कलाकारों की हिंदी फिल्मों में लंबी परंपरा रही है। उसमें करीब डेढ़ दशक से जॉनी लीवर ने अपनी जगह बनायी और उस पर डटे रहे हैं। उनका अपना एक दर्शक वर्ग है। पर कैरियर उन्होंने स्टेज शो करके शुरू किया था। 8० के दशक में उनके 'हंसी के हंगामें’ कैसेट बेहद लोकप्रिय हुए थे। उस जमाने में भी स्टेज पर कामेडी करके इतनी ऊंची पायदान पर पहुंचना कठिन था। लगभग हर बड़े शहर में ऐसे कलाकार होते थे। उन्हें 'वो मिमिक्री करने वाला’ के रूप में जाना जाता था। पर मुंबई के लोगों ने दो घंटे वाले इस हंसोड़ कलाकार को पसंद किया और जब उनका कैसेट आया तो वह हाथों हाथ बिक गया। इसकी बदौलत उनकी ख्याति मुंबई से निकलकर दूरदराज तक पहुंची। हजारों लोग मुंबई में उनके कामेडी शो में पहुंचते और मिमिक्री और चुटकुलों का मजा लूटते थे। पीछे बज रहे ड्रम पर उनका माइकल जैक्सन की स्टाइल में थिरकना लोगों का जी खुश कर देता था।
स्टेज से उठकर वे फिल्मों में पहुंच गए और सिनेमा से ऐसे मुब्तिला हुए कि फिर कि स्टेज शो करने की फुरसत क्या उनके बारे में सोचना भी कठिन हो गया। एक के बाद एक फिल्म। उन्होंने तब यह भी सोचा कि एक साथ दो काम करने से अच्छा है एक ही करो और उसमें अपना सौ प्रतिशत दो। लिहाजा बालीवुड में वे बंधे रहे। अब 16 साल बाद फिर वे स्टेज पर हैं। 'जॉनी लीवर लाइव’ नाम के इस कार्यक्रम की शुरुआत तीन महीने पहले हुई। ढाई घंटे का यह कार्यक्रम पिछली बार मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट्स में हुआ जहां यादों में धूमिल पड़ गयी 'हाउसफुल’ की तख्ती फिर लगानी पड़ी।
मुंबई, चेन्नई के अलावा कई शहरों में शो हो चुके हैं और वे सिल्वर जुबली शो की तरफ बढ़ रहे हैं जो उम्मीद है इसी साल होगा। जॉनी कहते हैं कि मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे फिल्मों में सफलता मिली और इन शो में भी। लेकिन इनके लिए कॉफी मेहनत करनी पड़ती है। मनोरंजन, मसाला, हास्य के साथ लोगों को जानने-समझने-देखने से मिला अनुभव सब कुछ आजमाना होता है। उन्हें फूहड़ता से परहेज है। वे कहते हैं दूसरे अगर दो अर्थी संवाद बोलते हैं तो उन्हें मुबारक। मैं तो ऐसा नहीं कर सकता। साफ-सुथरा हास्य मेरा मकसद है। मैं ध्यान रखता हूं कि कोई यह न कहे कि 'अरे इसने बच्चों, फैमिली के सामने यह क्या कह दिया।’
जॉनी को अमेरिका, कनाडा आदि से भी वहां शो करने के अनुरोध मिल रहे हैं पर उनका सिद्धांत है, 'काम आराम से करूंगा क्योंकि मुझे अपनी फैमिली को भी देखना है।’ दिलचस्प यह है कि उनकी लड़की जिम्मी वैसे तो पढ़ाई पूरी करके बिजनेस के क्षेत्र में जाना चाहती थी पर उसे भी कामेडी का चस्का लग गया है। जॉनी ने उसकी रुचि देखकर उसे दस मिनट दिये तो उसने बहुत तालियां बटोरीं। यह सिलसिला आगे बढ़ा। लीवर को तब बेहद खुशी होती है जब कोई उनसे कहता है 'देखना जॉनी भाई आपकी लड़की आपसे आगे जाएगी।’ उनसे शो में कुछ आइटम कामेडियन गौरव शर्मा भी देते हैं, और लेखक किरण कोरटियाल संचालन करते हैं। अपने शो में उन्हें ऐसे भी लोग मिलते हैं जो अपने युवा बेटे का परिचय कराते हुए कहते हैं कि 'जब हम आपके शो पहले देखते थे, तब यह बच्चा अपनी मां के पेट में था।’ जॉनी का ध्येय है कि लोगों को हमेशा हंसाते जाना है। इसमें वे प्राणप्रण से लगे हुए हैं।
स्टेज से उठकर वे फिल्मों में पहुंच गए और सिनेमा से ऐसे मुब्तिला हुए कि फिर कि स्टेज शो करने की फुरसत क्या उनके बारे में सोचना भी कठिन हो गया। एक के बाद एक फिल्म। उन्होंने तब यह भी सोचा कि एक साथ दो काम करने से अच्छा है एक ही करो और उसमें अपना सौ प्रतिशत दो। लिहाजा बालीवुड में वे बंधे रहे। अब 16 साल बाद फिर वे स्टेज पर हैं। 'जॉनी लीवर लाइव’ नाम के इस कार्यक्रम की शुरुआत तीन महीने पहले हुई। ढाई घंटे का यह कार्यक्रम पिछली बार मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट्स में हुआ जहां यादों में धूमिल पड़ गयी 'हाउसफुल’ की तख्ती फिर लगानी पड़ी।
मुंबई, चेन्नई के अलावा कई शहरों में शो हो चुके हैं और वे सिल्वर जुबली शो की तरफ बढ़ रहे हैं जो उम्मीद है इसी साल होगा। जॉनी कहते हैं कि मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे फिल्मों में सफलता मिली और इन शो में भी। लेकिन इनके लिए कॉफी मेहनत करनी पड़ती है। मनोरंजन, मसाला, हास्य के साथ लोगों को जानने-समझने-देखने से मिला अनुभव सब कुछ आजमाना होता है। उन्हें फूहड़ता से परहेज है। वे कहते हैं दूसरे अगर दो अर्थी संवाद बोलते हैं तो उन्हें मुबारक। मैं तो ऐसा नहीं कर सकता। साफ-सुथरा हास्य मेरा मकसद है। मैं ध्यान रखता हूं कि कोई यह न कहे कि 'अरे इसने बच्चों, फैमिली के सामने यह क्या कह दिया।’
जॉनी को अमेरिका, कनाडा आदि से भी वहां शो करने के अनुरोध मिल रहे हैं पर उनका सिद्धांत है, 'काम आराम से करूंगा क्योंकि मुझे अपनी फैमिली को भी देखना है।’ दिलचस्प यह है कि उनकी लड़की जिम्मी वैसे तो पढ़ाई पूरी करके बिजनेस के क्षेत्र में जाना चाहती थी पर उसे भी कामेडी का चस्का लग गया है। जॉनी ने उसकी रुचि देखकर उसे दस मिनट दिये तो उसने बहुत तालियां बटोरीं। यह सिलसिला आगे बढ़ा। लीवर को तब बेहद खुशी होती है जब कोई उनसे कहता है 'देखना जॉनी भाई आपकी लड़की आपसे आगे जाएगी।’ उनसे शो में कुछ आइटम कामेडियन गौरव शर्मा भी देते हैं, और लेखक किरण कोरटियाल संचालन करते हैं। अपने शो में उन्हें ऐसे भी लोग मिलते हैं जो अपने युवा बेटे का परिचय कराते हुए कहते हैं कि 'जब हम आपके शो पहले देखते थे, तब यह बच्चा अपनी मां के पेट में था।’ जॉनी का ध्येय है कि लोगों को हमेशा हंसाते जाना है। इसमें वे प्राणप्रण से लगे हुए हैं।
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